वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों के अनुरूप वास्तु दोषों का निवारण: एक व्यापक मार्गदर्शिका

वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों के अनुरूप वास्तु दोषों का निवारण: एक व्यापक मार्गदर्शिका

Mukesh Sah

3/12/20241 min read

श्री युग कंस्ट्रक्शंस आपके लिए वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों के आधार पर वास्तु दोषों का निवारण करने के लिए एक विस्तृत मार्गदर्शिका प्रस्तुत करता है।

परिचय:

वास्तु शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो भवनों के निर्माण और डिजाइन के लिए दिशानिर्देश प्रदान करता है। इसका उद्देश्य ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करके और सकारात्मक वातावरण को बढ़ावा देकर भवनों में रहने वालों के जीवन में खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि लाना है।

वास्तु दोष भवनों में ऊर्जा के प्रवाह को बाधित करने वाले त्रुटियां या दोष हैं, जिससे नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न होते हैं। वास्तु दोष के विभिन्न प्रकार होते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • दिशा संबंधी दोष: भवनों के मुख्य द्वार, रसोई, पूजा कक्ष, और सोने के कमरे जैसी महत्वपूर्ण जगहों का गलत दिशा में होना।

  • संरचनात्मक दोष: भवनों में टूटी हुई खिड़कियां, दरवाजे, या सीढ़ियां, या अव्यवस्थित और अस्त-व्यस्त वातावरण।

  • रंग संबंधी दोष: भवनों के लिए गलत रंगों का उपयोग, या अंधेरे और दम घुटने वाले वातावरण का निर्माण।

निवारण:

वास्तु दोषों का निवारण एक महत्वपूर्ण कदम है जो भवनों में रहने वालों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

श्री युग कंस्ट्रक्शंस द्वारा सुझाए गए कुछ निवारण उपाय:

1. दिशा संबंधी दोष:

  • मुख्य द्वार: यदि मुख्य द्वार गलत दिशा में है, तो इसे सही दिशा में स्थानांतरित करने का प्रयास करें। यदि स्थानांतरण संभव नहीं है, तो आप दर्पण, पौधों, या अन्य वास्तु उपायों का उपयोग करके नकारात्मक ऊर्जा को कम कर सकते हैं।

  • रसोई: रसोई को अग्नि कोण (दक्षिण-पूर्व) में स्थापित करना महत्वपूर्ण है। यदि यह संभव नहीं है, तो आप रंग योजना, उपकरणों की व्यवस्था, और अन्य वास्तु उपायों के माध्यम से ऊर्जा प्रवाह को संतुलित कर सकते हैं।

  • सोने का कमरा: शयनकक्ष को पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थापित करने से बचें। यदि यह संभव नहीं है, तो आप बिस्तर की स्थिति, रंग योजना, और अन्य वास्तु उपायों के माध्यम से ऊर्जा प्रवाह को अनुकूलित कर सकते हैं।

2. संरचनात्मक दोष:

  • टूटी हुई खिड़कियां और दरवाजे: टूटी हुई खिड़कियों और दरवाजों को तुरंत ठीक करें क्योंकि वे नकारात्मक ऊर्जा को प्रवेश करने का मार्ग प्रदान करते हैं।

  • अव्यवस्था: घर को साफ और सुव्यवस्थित रखें। अव्यवस्था नकारात्मक ऊर्जा को जमा करती है और ऊर्जा प्रवाह को बाधित करती है।

  • सीढ़ियां: सीढ़ियों को सही दिशा में स्थापित करें और उन्हें अच्छी तरह से रोशन रखें।

3. रंग संबंधी दोष:

  • भवन के रंग: भवनों के लिए हल्के और शांत रंगों का उपयोग करें। गहरे और चमकीले रंगों का उपयोग कम से कम करें।

  • रंगों का प्रभाव: रंगों का उपयोग ऊर्जा प्रवाह को संतुलित करने और सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए किया जा सकता है।

4. अन्य वास्तु उपाय:

  • पौधे: घर के अंदर और बाहर पौधे लगाएं। पौधे नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करते हैं और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं