वास्तु शास्त्र के अनुसार बालकनी का निर्माण: सकारात्मक ऊर्जा और प्राकृतिक प्रकाश को आमंत्रित करें

वास्तु शास्त्र के अनुसार बालकनी का निर्माण: सकारात्मक ऊर्जा और प्राकृतिक प्रकाश को आमंत्रित करें

Mukesh Sah

3/31/20241 min read

श्री युग कंस्ट्रक्शंस जानता है कि वास्तु शास्त्र में बालकनी का विशेष महत्व है। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और प्राकृतिक प्रकाश को आमंत्रित करने का एक महत्वपूर्ण द्वार है।

यहाँ कुछ वास्तु टिप्स दिए गए हैं जो आपके घर की बालकनी को बेहतर बना सकते हैं:

1. दिशा:

  • बालकनी का मुख पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में होना शुभ माना जाता है।

  • दक्षिण दिशा में बालकनी बनाने से बचना चाहिए।

2. आकार:

  • बालकनी का आकार वर्गाकार या आयताकार होना चाहिए।

  • अनियमित आकार की बालकनी से बचना चाहिए।

3. ऊंचाई:

  • बालकनी की ऊंचाई घर के मुख्य द्वार से कम नहीं होनी चाहिए।

  • बहुत ऊंची बालकनी भी नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकती है।

4. फर्श:

  • बालकनी के फर्श के लिए हल्के रंगों का उपयोग करें।

  • संगमरमर या ग्रेनाइट जैसे टाइल्स का उपयोग करना अच्छा माना जाता है।

5. रेलिंग:

  • बालकनी की रेलिंग मजबूत और सुरक्षित होनी चाहिए।

  • लोहे या एल्यूमीनियम की रेलिंग का उपयोग करना अच्छा माना जाता है।

6. पौधे:

  • बालकनी में तुलसी, मनी प्लांट या अन्य सकारात्मक पौधे लगाना शुभ माना जाता है।

  • कांटेदार पौधों से बचना चाहिए।

7. अन्य टिप्स:

  • बालकनी को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखें।

  • बालकनी में अनावश्यक सामान न रखें।

  • बालकनी में कूड़ा-कचरा न फेंकें।

श्री युग कंस्ट्रक्शंस आपके घर की बालकनी को वास्तु के अनुसार बनाने में आपकी मदद कर सकता है।

यह भी ध्यान रखें:

  • वास्तु शास्त्र एक जटिल विषय है और यह सिर्फ एक मार्गदर्शिका है।

  • यदि आपको वास्तु शास्त्र के बारे में कोई प्रश्न है, तो किसी विशेषज्ञ से सलाह लें।

श्री युग कंस्ट्रक्शंस आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा और प्राकृतिक प्रकाश का प्रवाह लाने में आपकी मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है!